GST Rate 2026: देश में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी की दर व्यवस्था में पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। साल 2025 में जीएसटी परिषद ने जीएसटी दो दशमलव शून्य नाम से नए सुधार लागू किए थे जो अभी भी प्रभावी हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और आम आदमी पर बोझ कम करना था। जहां पहले चार अलग-अलग जीएसटी स्लैब थे वहीं अब मुख्य रूप से पांच प्रतिशत और अठारह प्रतिशत की दो बड़ी दरें प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ जरूरी वस्तुओं पर शून्य प्रतिशत और लग्जरी सामान पर अट्ठाईस से चालीस प्रतिशत तक का कर लगता है।
यह बदलाव आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालते हैं क्योंकि रोजमर्रा की जरूरत के कई सामानों की कीमतों में इजाफा या कमी हुई है। सरकार का मानना है कि सरल कर व्यवस्था से व्यापार करना आसान होगा और कर चोरी भी कम होगी। लेकिन आम नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि किन चीजों पर अब कितना टैक्स लग रहा है और इससे उनके घरेलू बजट पर क्या फर्क पड़ेगा।
अब जीएसटी की दरें कैसी हैं
वर्तमान में जीएसटी की दर संरचना को काफी हद तक सरल बनाया गया है। शून्य प्रतिशत जीएसटी के दायरे में अनाज जैसे चावल, गेहूं, दालें, दूध, पनीर, अंडे, ताजे फल और सब्जियां आती हैं। साथ ही बुनियादी शिक्षा और अस्पताल की जरूरी सेवाओं पर भी कोई कर नहीं लगता। पांच प्रतिशत जीएसटी के दायरे में पैकेज्ड अनाज, बिस्किट, चाय, चीनी, घरेलू एलपीजी सिलेंडर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। अठारह प्रतिशत जीएसटी अधिकांश उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर लगता है जैसे फर्नीचर, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल और यात्रा सेवाएं।
सबसे ऊंची दर यानी अट्ठाईस से चालीस प्रतिशत जीएसटी महंगी कारों, बड़ी बाइकों, तंबाकू उत्पादों, शराब और लग्जरी सामान पर लगती है। सरकार ने जानबूझकर जरूरत की चीजों पर कम और विलासिता की वस्तुओं पर ज्यादा कर लगाया है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को कुछ राहत मिली है जबकि अमीर वर्ग पर कर का बोझ अधिक है। यह व्यवस्था सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर आधारित है।
कौन से सामान हुए सस्ते
जीएसटी सुधारों के बाद कई रोजमर्रा के सामान सस्ते हो गए हैं जिससे आम लोगों को फायदा हुआ है। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और डिटर्जेंट जैसे जरूरी सामानों पर पहले अठारह प्रतिशत टैक्स लगता था लेकिन अब इसे घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इससे स्वच्छता और सफाई से जुड़े उत्पाद सस्ते हो गए हैं। रेडीमेड कपड़े और जूते चप्पल पर भी टैक्स घटाया गया है। मध्यम दर्जे के कपड़े और जूतों पर पहले बारह से अठारह प्रतिशत टैक्स था जो अब पांच प्रतिशत हो गया है।
छोटी और मध्यम आकार की कारों तथा साढ़े तीन सौ सीसी तक की बाइकों पर भी जीएसटी घटाई गई है जिससे वाहन खरीदना थोड़ा आसान हुआ है। रसोई के पैकेज्ड सामान जैसे बिस्किट, चाय, चीनी और पैकेज्ड फल सब्जियों पर भी केवल पांच प्रतिशत टैक्स लगता है। इन सभी बदलावों से मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक खर्च में कुछ कमी आई है और उनकी क्रय शक्ति बढ़ी है।
कौन सी चीजें हुईं महंगी
वहीं दूसरी ओर कुछ चीजों पर जीएसटी बढ़ाई गई है जिससे वे महंगी हो गई हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अट्ठाईस प्रतिशत जीएसटी के साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क भी लगता है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजों को महंगा करके उनके उपयोग को हतोत्साहित करना है। इसी तरह शराब और पान मसाला पर भी ऊंची दरें लगाई गई हैं क्योंकि इन्हें विलासिता की वस्तुएं माना जाता है। व्यावसायिक उपयोग के एलपीजी सिलेंडरों पर भी जीएसटी बढ़ाई गई है जिसका असर रेस्तरां और छोटे व्यवसायों पर पड़ा है।
महंगी हाउसिंग सोसाइटियों के रखरखाव शुल्क पर भी जीएसटी बढ़ाई गई है। इससे बड़े शहरों में महंगे फ्लैट में रहने वाले लोगों का खर्च बढ़ गया है। ये सभी बदलाव इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि जो लोग ज्यादा खर्च कर सकते हैं उन्हें ज्यादा कर देना चाहिए। लग्जरी सामान और हानिकारक उत्पादों पर ऊंचा कर लगाकर सरकार राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक लक्ष्य भी हासिल करना चाहती है।
आगे क्या बदलाव संभव हैं
साल 2026 में जीएसटी परिषद की आने वाली बैठकों में और भी सुधार होने की उम्मीद है। बारह प्रतिशत की जीएसटी सीमा को पूरी तरह खत्म करने की योजना है और उसमें आने वाली वस्तुओं को पांच या अठारह प्रतिशत के स्लैब में शिफ्ट किया जा सकता है। अनाज, दालें, आटा और खाने का तेल जैसी अति आवश्यक वस्तुओं पर शून्य प्रतिशत जीएसटी ही बनी रहेगी ताकि गरीब लोगों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। इलेक्ट्रॉनिक सामान, बीमा और घरेलू उपकरणों पर दरों को और सरल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे आम आदमी को फायदा मिल सके और कर प्रणाली और पारदर्शी बने।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। जीएसटी दरें समय-समय पर जीएसटी परिषद द्वारा बदली जा सकती हैं। विभिन्न उत्पादों और सेवाओं पर लगने वाली वास्तविक दरें उनकी श्रेणी और विशेषताओं पर निर्भर करती हैं। किसी भी व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले कृपया जीएसटी की आधिकारिक वेबसाइट या कर सलाहकार से नवीनतम और सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त करें। लेखक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं है।


